Tuesday, 20 February 2018

गाँव की यादें

                           
  
आज सुनाता हूँ कुछ भूली बिसरी मेरे गाँव की बातें,
मेरे गाँव के वो सुनहरे दिन वो चांदनी राते,

वो सबका मिलकर चौपालों पर बैठना,
छोटी छोटी बातों पर दोस्तों से ऐंठना,
हर त्यौहार पर सबका एक हो जाना,
मिलकर एक परिवार बन जाना,
साथ में तीज त्यौहार मनाना,
वही था वास्तव में गाँव का असली खजाना,
लाती थी किसी की बुआ किसी की मौसी साथ अपने खुशिओं की सौगाते,
आज सुनाता हूँ कुछ अच्छी भूली बिसरी मेरे गाँव की बातें,

रोज शाम दादी के साथ मंदिर जाना,
मंदिर तो था बस दादी के साथ घुमने जाने का एक बहाना,
खेतों पर जाकर वो कुऐ पर नहाना,
होकर तरो ताजा फिर पुरे गाँव में हुडदंग मचाना,
रोज रात को दादी का अलग अलग कहानियां सुनना,
कहानी सुनते सुनते दादी की गोद में ही सो जाना,
काहनी का थी वो बस दादी के प्यार की अनुपम बरसात थी,
धरती के उपर स्वर्ग हो जैसे कुछ ऐसी मेरे गाँव की बात थी.......||||||||||
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Chiksa

Wednesday, 3 January 2018

केसरिया ध्वज दिला रहा है हमको याद वही पुरानी...।।।।

 


जब शौर्य और साहस के बल पर दुनिया बनी थी हमारी दीवानी,
केसरिया बाना पहन जब रणभूमि में कूदी रजपूती जवानी,
स्वाभिमान की रक्षा हेतु जब जौहर करती थी माँ पद्मिनी जैसी महारानी,
आज केसरिया ध्वज दिला रहा है हमको याद वही पुरानी....।।।।

राणा प्रताप के साहस ने जब अकबर को याद दिला दी थी उसकी नानी,
17 बार गौरी को करके माफ जब सम्राट चौहान ने लिखी क्षमादान की नई कहानी,
गौरा बादल की स्वामिभक्ति जब इस दुनिया ने थी देखी और पहचानी,
आज केसरिया ध्वज दिला रहा है हमको याद वही पुरानी....।।।।

घड़ी विकट है संस्कृति का विनाश निकट है शांति की बाते हुई अब बेमानी,
अब उठेंगे शस्त्र धधकेगी ज्वाला प्रतिशोध की और सीने में जागेगी वीर भवानी,
दिखाना है अब जमाने को केवल वक्त बदला था ना बदला अभी तक रक्त स्वाभिमानी,
आज केसरिया ध्वज दिला रहा है हमको याद वही पुरानी....।।।।

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जय माँ भवानी        जय क्षात्र धर्म

     🚩🚩 केसरिया क्रान्तिकारी🚩🚩

Friday, 22 December 2017

घोर अँधेरे को जो चीरे वो सूर्य की किरण सी पहचान हो तुम..।।

मिशन किरण



कुछ सिमटती कुछ संभलती,
मानवता को रख आगे जो खुद पीछे चलती,
जिद पर अपनी जो पुरे जग से झगड़ती,
मिले गरीबों को हक़ बस इसी बात पर सबसे लड़ती,
कलयुग में माँ सरस्वती जैसी शान हो तुम,
घोर अँधेरे को जो चीरे वो सूर्य की किरण सी पहचान हो तुम.....।।।।।

इंसानियत है क्या ये तुमने सिखलाया है,
बनकर आशा की किरण चहुँ और उजियारा तुमने फैलाया है,
पहचान नहीं होती उम्र की मोहताज ये तुमने बतलाया है,
कर न सके जो महारथी वो तुमने करके दिखलाया है,
गर्व से उठा मस्तक चलते है जो उन अपनों का अभिमान हो तुम,
घोर अँधेरे को जो चीरे वो सूर्य की किरण सी पहचान हो तुम......।।।।।

चलते रहना अपने पथ पर कभी रुकना नही,
भले ही आयें संकट हजार लड़ने से कभी थकना नही,
खड़े है साथ आपके हम सब किसी के आगे झुकना नहीं,
दिलाना है हक़ हकदारों को जिद से कभी अपनी हटना नही,
गरीबों को जो मिला ईश्वर का वो अभयदान हो तुम,
घोर अँधेरे को जो चीरे वो सूर्य की किरण सी पहचान हो तुम.....।।।।।


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 🚩🚩केसरिया क्रांतिकारी 🚩🚩




Monday, 18 December 2017

आज एक कवि की कलम सीधे तुमसे संवाद करेगी|



चलो मान लिया की हिमाचल गुजरात जीत गये,
चुनावी संकट के दिन भले ही इन राज्यों से बीत गये,
पर याद करो जरा गुजरात को क्या परिणाम तुम्हे मिला है,
अपने गढ़ में खाई चोट ऐसा इनाम तुम्हे मिला है,
पद्मावती पर रह खामोश तुमने हिंदुत्व पर प्रहार किया है,
उदयपुर में बरसा लाठियां तुमने स्वाभिमान पर वार किया है,
गुजरात में मिली इस अधूरी जीत पर अहंकार में न फूलो तुम,
चतुर सिंह, आनन्दपाल पर उमड़े जनाक्रोश को  न भूलो तुम,
आज एक कवि की कलम सीधे तुमसे संवाद करेगी,
ये मुस्लिम तुष्टिकरण की निति देखना एकदिन तुम्हे बर्बाद करेगी जी,
देखकर आक्रोश जनता का देखो पक्ष विपक्ष ये सारा धूज रहा,
कमल का फूल हमारी भूल पुरे राजस्थान में बस यही नारा गूंज रहा,
जो मात्र सत्ता दल का करे गुणगान वो कोई कवि नहीं है जी,
सहता रहूँ अत्याचार ऐसी मेरी छवि नही है जी.....।।।।
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🚩🚩केसरिया क्रांतिकारी🚩🚩

Saturday, 9 December 2017

जागो ऐ रणधीरों


जागो ऐ शूरवीरों,
जागो मेरे समाज के रणधीरों,
देखो कैसा संकट आज ये छाया,
षड्यंत्रों में समाज ये घिर आया,
अन्धकार का ये बादल छाया,
वक्त ने वीरों को लाचार बनाया,

वक्त से आज तुम लड़ जाओ ओ वीरों,
जागो मेरे समाज के रणधीरों.....।।।।

अपनी खामोशी से क्या इतना तुम्हे आज प्यार हुआ,
देखों षड्यंत्र के तहत तुमपर कितना अत्याचार हुआ,
कल का अपराजित योद्धा क्यूँ इतना लाचार हुआ,
आखिर क्यूँ शत्रुओं का स्वप्न ये साकार हुआ,

अब तो स्वाभिमान जगाओ ओ वीरों,
जागो मेरे समाज के रणधीरों.....।।।।

बनकर राणा तुम लड़ जाओ,
हठी हमीर जैसे जिद पर अड़ जाओ,
कुछ ऐसा करके दिखलाओ,
की इतिहास पुन: अपना दोहराओ,

अपने स्वाभिमान को पहचानों ओ वीरों,
जागो मेरे समाज के रणधीरों.....।।।।




केसरिया क्रांतिकारी




Monday, 27 November 2017

उमड़ता राजपूत विरोध - एक प्रचण्ड क्रांति का आगाज





जब जब शांत हुए समुंदर में भूकम्प के झटके लगते है तो वो अंदर ही अंदर हिल जाता है। और इसके बाद सुनामी के रूप में जो विनाश आता है वो भयानक ही होता है।

विगत कुछ वर्षों से राजपूत समाज उसी समुंदर की भाँति शांत था लेकिन समय समय पर सरकार और इन भाँडो ने इतिहास, सम्मान, स्वाभिमान पर हमले कर करके राजपूतों को अंदर तक हिला के रख दिया है। वर्तमान में हिंसक होते राजपूत इसी का परिणाम है और शायद आने वाले समय मे ये रजपूती सुनामी एक भयंकर रूप धारण करेगी जिसका परिणाम या तो रजपूती स्वभिमान की विजय होगा या ये कौम समाप्त हो जाएगी।

देखते है अब वक्त के गर्भ में क्या छुपा है क्षत्रिय कौम का अंत या उनके स्वर्णिम पल का उदय पर ये निश्चित है कि आने वाले समय मे देश के अंदर एक अनुशासित व न्यायप्रिय तथा रक्षक की भूमिका को धारण करने वाली कौम पहली बार अनुशासन को तोड़कर अपने स्वाभिमान और सम्मान के लिए लड़ेगी।

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               केसरिया क्रान्तिकारी

Sunday, 19 November 2017

वक्त आ पड़ा है वीरो की अब हथियार उठाए हम



देख भंसाली अपनी सारी हदों को तूने तोड़ दिया,
अहिंसक बने बैठे क्षत्रियो को पुनः हिंसा की तरफ मोड़ दिया,
पैसों के चक्कर मे तूने इतिहास से खिलवाड़ भरपुर किया,
बनने को हिंसक तूने ही हमें मजबूर किया,


अब तू ही बता क्यों ना क्षत्रिय परम्परा तुझे दिखालये हम,

वक्त आ पड़ा है वीरो की अब हथियार उठाये हम...।।


शर्म कर रे भांड तूने खिलजी जैसे को ही नायक बना दिया,
एक वहशी दरिंदे को तूने प्रेम का वाहक बना दिया,
बना गुलाम तू मुगली परम्परा का कैसा ये व्यवहार किया,
हर बार अपनी फिल्मो से हिंदू भावनाओं को तार तार किया,

कैसे करें धर्म का सम्मान ये आज तुझे सिखलाये हम,

वक्त आ पड़ा है वीरो की अब हथियार उठाये हम...।।


समय विकट था चितौड़ धरा खून से लथपथ थी,
स्वाभिमान की लड़ाई अपने अंतिम पथ पर थी,
लाल रक्त से शोभित धरा को तूने गुलाबी कर डाला,
शौर्य जीवनी को तूने आखिर क्यों प्रेम कहानी बना डाला,


क्या होता है शौर्य ये आज तुझे बतालाये हम,

वक्त आ पड़ा है वीरो की अब हथियार उठाये हम...।।

बहुत हुआ अब कैसे करे सम्मान इतिहास का ये तुझे सीखा देंगे,
क्या था क्षत्रिय शौर्य मैदान ए जंग में तुझे दिखा देंगे,
अब तू देख हर दिन कैसे ये जौहर की ज्वाला ओर प्रज्वलित होती है,
देखेंगे अब हम भी कैसे तुझसे हमारी संस्कृति यहां कलंकित होती है,

बैठ घुटनो पर मांग ले माफी ये तुझे समझाए हम,

वरना वक्त आ पड़ा है वीरो की अब हथियार उठाये हम......।।।।।

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                *केसरिया क्रान्तिकारी*