Friday, 17 August 2018

केरोली - बेहतरीन निशानेबाज (एक सत्य घटना जो जिंदा कर दे मरे हुए हौसले को।)


यह कहानी है 1938 की एक हंगरी सेना (Hungarian Army) के जवान की जिसका नाम था केरोली  (Karoly Takacs) । वो एक पिस्तौल शूटिंग का बेहतरीन खिलाड़ी था और उसका सपना भी यह था की वो पिस्तौल शूटिंग (Pistol Shooting) में ओलंपिक (Olympics) में स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीते । उसकी मेहनत, लगन और रिकॉर्ड को देखते सबको यह लग भी रहा था की इस बार के 1940 में होने वाले ओलंपिक (Olympics) में यही स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतेगा ।
उसकी वजह यह थी की वो उस हंगरी देश (Hungary) का सबसे बेहतरीन पिस्तौल निशानेबाज़ (Pistol Shooter) था और उसने उस देश (Country) में जितनी भी राष्ट्रीय प्रतियोगिता (National Championship) हुई थी उसको वो जीत चुका था । सिर्फ उसका एक सपना था ओलंपिक (Olympics) में स्वर्ण पदक जितना और वो उस सपने से सिर्फ थोड़ा ही दूर था क्यों की दो साल बाद 1940 में ही ओलंपिक (Olympics) था ।
लेकिन उसके इस सपने पर अचानक से पानी फिर गया, वो एक आर्मी केम्प में अभ्यास कर रहा था उस वक्त एक हादसा हो गया । उसके दाहिने हाथ (Right Hand) में एक हथगोला (Hand Grenade) का विस्फोट हो गया और Karoly का हाथ इतनी बुरी तरह से जल गया की अब उस हाथ से वो कुछ नहीं कर सकता था, उसका वो हाथ एकदम बेकार हो गया, इस हादसे में Karoly का दाहिना हाथ (Right Hand) चला गया ।
मतलब सब ख़तम । जो उसका सपना था वो रातों रात मिट्टी में मिल गया, अगर इस जगह पर हममें से कोई होता तो अपनी किस्मत पे रोता, और हार मान लेता लेकिन यह बहाने आम लोगों के लिए है Karoly के लिए नहीं ।
उसने इतने बड़े हादसे और कुदरत की इस मज़ाक के सामने हार नहीं मानी । उसे तो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जितना ही जितना था, उसका लक्ष्य (Goal) तो एकदम स्पष्ट था उसका मनोबल तो लोहे के तरह मजबूत फौलादी था । वो हार नहीं माना उठ खड़ा हुआ और उसने तय किया कोई बात नहीं इस हादसे में मेरा दाहिना हाथ (Right Hand) चला गया तो क्या हुआ मेरे पास बायां हाथ (Left Hand) तो है, उसने तय किया की वो अब अपने बाएँ हाथ (Left Hand) को दुनिया का सबसे बेहतरीन हाथ बनाएगा (Pistol Shooting Hand) ।
अस्पताल में एक महिना बिताने के बाद जैसे ही उसे अस्पताल से छुट्टी मिली तो वो फिर से अपने मक़सद में लग गया, हां उसने फिर से अपने दाएँ हाथ (Left Hand) से पिस्तौल शूटिंग का अभ्यास शुरू कर दिया । उसे शुरुआत में बहुत दर्द हुआ बहुत तकलीफों का सामना करना पड़ा लेकिन फिर भी Karoly ने हार नहीं मानी ।
Karoly ने एक साल बहुत जमकर अभ्यास किया और एक साल बाद 1939 में वो वापस आया जहाँ हंगरी (Hungary) में नेशनल चैंपियनशिप हो रही थी उसमे हिस्सा लेने, तब तक किसी को पता नहीं था की Karoly अपने बाएँ हाथ (Left Hand) से अभ्यास कर रहा था । तो जैसे दूसरे प्रतियोगियों (Competitors) ने Karoly को देखा तो सब चौक गए और फिर उन्हें लगा की Karoly यहाँ हमारा हौसला बढ़ाने आया है, तो सब उसका धन्यवाद करने लगे लेकिन सबको तब झटका लगा जब Karoly ने कहा में यहाँ आप लोगों का हौसला बढ़ाने नहीं आपसे मुकाबला करने आया हूँ । आप लोगों से लड़ने आया हूँ ।
वहाँ Karoly का मुकाबला था उन लोगों से जो अपने सबसे अच्छे हाथ से निशाना लगा रहे थे और Karoly अपने बाएँ हाथ (Left hand) से निशान लगा रहा था, बावजूद उसके यह हंगरी के नेशनल चैंपियनशिप Karoly जीत गया और उसकी बहुत तारीफ़ हुई सब हैरान थे की ये कैसे हो सकता है चारों तरफ बस यही चर्चा थी और Karoly रातों रात हीरो बन चुका था ।
लेकिन Karoly वहाँ तक नहीं रुका, उसका तो बचपन से एक ही सपना (Dream) था एक ही लक्ष्य (Goal) था उसे तो दुनिया का सबसे बेहतरीन निशानेबाज़  (World Best Pistol Shooter) बनना था  । इसलिए उसने अब 1940 में होने वाले ओलंपिक का अभ्यास शुरू कर दिया और फिर से सबको लगने लगा था की हां इस बार यही ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतेगा और वो बहुत ही सही तरीके से आगे बढ़ रहा था । लेकिन शायद किस्मत को यह मंज़ूर नहीं था किस्मत ने फिर से अपना पलड़ा बदला और 1940 के ओलंपिक विश्व युद्ध (World War) की वजह से रद्द हो गए ।
उसका सपना अब फिर से धुँधला होता दिख रहा था सबको लगने लगा की अब तो सब ख़तम हो गया लेकिन हार माने ऐसा Karoly था नहीं । उसने कहा कोई बात नहीं यह नहीं तो आने वाले ओलंपिक 1944 में स्वर्ण पदक जीतूँगा और उसने अपनी मेहनत अभ्यास जारी रखा ।
लेकिन किस्मत भी उसका बार बार इम्तिहान ले रहा था, 1944 में विश्व युद्ध (World War) की वजह से फिर से ओलंपिक रद्द हो गए । अब सबने सोच लिया था की Karoly का सपना सपना ही रह जाएगा और वो कभी हक़ीकत नहीं बन पाएगा ।
लेकिन किसी को यह नहीं पता था की Karoly ऐसे हार मानने वालो में से नहीं था, वो तो बना ही था जीत हासिल करने के लिए वो था एक सच्चा योद्धा (Real Fighter), सच्चा विजेता (Winner) उसने फिर से 1948 में होने वाले ओलंपिक की तैयारियाँ करने लगा और इस बार ओलंपिक में भाग लिया । उस समय Karoly की उम्र 38 साल हो गई थी और उसके प्रतिस्पर्धी (Competitors) बहुत ही जवान जोशीले थे । सब अपने बेहतरीन हाथ (Best Hand) से मुकाबला कर रहे थे और Karoly अपने बाएँ हाथ (Left Hand) से, फिर भी Karoly ने उनका मुकाबला किया । और उसने पिस्तौल निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीता । हां उसने कर दिखाया, हां नामुमकिन को भी मुमकिन कर दिखाया और आज उसका सपना सिर्फ सपना नहीं हक़ीकत बन गया ।
पूरी दुनिया हिल गई की यह कैसे हो सकता है लेकिन सिर्फ एक व्यक्ति के अपने हार ना मानने वाले नज़रिये से यह संभव हुआ और Karoly सिर्फ वहाँ तक नहीं रुका उसने 1952 फिर से उसने ओलंपिक में हिस्सा लिया और दोबारा स्वर्ण पदक जीता ।

इस कहानी से शिक्षा मिलती है की सपने कभी खत्म नही होते अगर उन्हें पूरा करने की इच्छा शक्ति को कभी मरने नहीं दिया जाए तो। हमारे अंदर के साहस और निश्चय पर ही हमारे सपने के पुरे होने का भार होता है। 
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*केसरिया क्रांतिकारी* 

Saturday, 14 April 2018

मत छोड़ो दरिंदो को इनकी सजा फांसी हो








क्या लिखूं कैसे लिखूं आज कलम मेरी थर्राती है,
ना जाने क्यूँ फूलों सी बेटी घर से निकलने में घबराती है,
देख रोज रोज होते बलात्कार आँखे शर्म से झुक जाती है,
क्यों है लाचार व्यवस्था इतनी बस यही बात दिल को चुभ जाती है,

उठो शक्तिस्वरूपा कोई तो रानी झाँसी हो,
मत छोड़ो दरिंदो को की अब तुम्हारे हाथो बीच चौराहें इनको फांसी हो...||||

देखो पैसो के बल पर राजनीती का कैसा खेल बना है,
आज अपराधी और मंत्रियो का बड़ा अजीब मेल बना है,
साला कानून तक इन पैसे वालो की रखैल बना है,
सबने मिलकर लूटी इज्जत कुछ ऐसा तालमेल बना है,

बुलंद करो स्वर अपने अहसास हो की तुम भी भारत वासी हो,
मत छोड़ो दरिंदो को की अब तुम्हारे हाथो बीच चौराहें इनको फांसी हो...||||

हालात बिगड़े है कानून बिका है मत तुम इनका इतंजार करो,
कब तक तड़पोगी आखिर क्यूँ तड़पोगी अब तो कुछ प्रतिकार करो,
इज्जत तुम्हारी तुमको ही रक्षा करनी है अब खुद को तैयार करों,
केसरिया क्रांतिकारी है साथ तुम्हारे अब बन रणचंडी तुम दरिंदों का संहार करो,

स्वयं की रक्षा हेतु उठाओं तलवारे जो वर्षों से दुष्टों के खून की प्यासी हो,
मत छोड़ो दरिंदो को की अब तुम्हारे हाथो बीच चौराहें इनको फांसी हो...||||
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            ⛳⛳⛳⛳ केसरिया क्रांतिकारी ⛳⛳⛳⛳


Friday, 30 March 2018

सुनलो ए क्षत्रियों तुम्हारा धूमिल होता केसरिया ध्वज बोल रहा हूँ मैं...।।।।



गगन को छूकर इठलाता था,
क्या होता है लहराना ये दिखलाता था,
धर्म का पालन करना सिखलाता था,
कैसे जीना है क्षत्रिय बन ये हमेशा बतलाता था,
बन्द हो चुके मेरे इतिहास को आज खोल रहा हूँ मैं,
सुनलो ए क्षत्रियों तुम्हारा धूमिल होता केसरिया ध्वज बोल रहा हूँ मैं...।।।।

लाखो योद्धाओं का रक्त मुझमे ही समाया था,
पहन केसरिया बाना वीरों ने रण में युद्ध कौशल दिखलाया था,
ना जाने कितने शत्रुओं के रक्त से उन्ही को नहलाया था,
तब जाकर मैं शान से उस गगन में गर्व से लहराया था,
आज उन्ही वीरों की संतानों के साहस को तोल रहा हूँ मैं,
सुनलो ए क्षत्रियों तुम्हारा धूमिल होता केसरिया ध्वज बोल रहा हूँ मैं...।।।।

अब भी सम्भलों अपनी शक्ति को पहचानों तुम,
पूर्वजों ने जो कि उस केसरिया भक्ति को पहचानों तुम,
मुझमे समाये वीरों के रक्त की कीमत पहचानों तुम,
हो विश्वविजेता अपनी हिम्मत को पहचानों तुम,
तुम्हारे अंदर सो चुके क्षत्रियत्व को आज टटोल रहा हूँ मैं,
सुनलो ए क्षत्रियों तुम्हारा धूमिल होता केसरिया ध्वज बोल रहा हूँ मैं...।।।।

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                                    केसरिया क्रान्तिकारी


Wednesday, 7 March 2018

युवा पीढ़ी के भटकाव के कारण कुँवर चेतन सिंह चौहान की नजर में|


सभी बड़े भाइयों, हमउम्र और छोटे भाइयों को सादर जय माता जी की सा।
 

एक भाईसाब ने पूछा की, "महिलाओं के प्रति घटिया सोच का कारण क्या है
हमारे संस्कार हमारी सोच,हमारी शिक्षा,हमारा सिस्टम,हमारा वातावरण,हमारा खानपान
या हमारा स्कूल/कॉलेज?"

उनके सवाल का जवाब मेरे शब्दों में ये है -

देखिए सभी बिंदु कही ना कही इसके जिम्मेदार है क्योंकि सभी की अपनी एक अहमियत होती है व्यक्ति के चरित्र निर्माण में।

मैं माता पिता के दिये संस्कारों पर कोई उंगली नही उठा रहा क्योंकि इतना मुझे हक नही लेकिन आजके पेरेंट्स अपने बच्चों को सोशल लाइफ से जुड़ने का अवसर तो प्रदान करते है, आधुनिकता से सम्पर्क तो कराते है, लेकिन उन्हें अपने इतिहास, शास्त्रों से परिचित नही करवाते जिसका असर आज की युवा पीढ़ी पर साफ साफ दिखाई देता है। पेरेंट्स टेलीविजन पर पर्दर्शित जोधा अकबर तो दिखा देते है पर साथ मे बैठकर उन्हें ये नही बताते की वास्तव में जोधा अकबर का इतिहास क्या है। फिर वही बेटी या बेटा जब घर की इज्जत लुटवाता है तो सिर पिट लेते है। बस यहीं कमी रह जाती है माँ पिता के संस्कारों में।

हमारा सिस्टम सबसे बेकार हो चला जा क्योंकि यहां संवेदना या संस्कृति कोई मायने नही रखती सिर्फ पैसा और प्रदर्शन मायने रखता है इसलिए सिस्टम तो हर प्रकार से जिम्मेदार है आज के युवाओं के आचरण के लिए।

हमारी सोच भी आज आधुनिकता के दौर में आधुनिक हो चली है फिर वो चाहे नारी सम्मान हो, माता पिता का या बुजुर्गों का सम्मान हो या अन्य कोई भी विषय सभी पर हम अपनी संस्कारित सोच को खोकर आधुनिक तौर पर सोचने लगे है इसलिए कुछ हद तक ये भी जिम्मेदार है।

हमारा वातावरण बेशक घरेलू स्तर पर सही हो परन्तु सबसे ज्यादा असर सोसाइटी के वातावरण का पड़ता है जो आजके समय बहुत हद तक दूषित हो चला है और इसका सीधा सीधा असर मानवीय सोच और समझ पर पड़ा है। हर जगह बलात्कर, छेड़छाड़ आदि घटाएँ आम हो चली है और कहते ह खरबूजे को देख खरबूजा रंग बदल लेता है तो जैसा आसपास हो रहा है वैसा ही कुछ युवा पीढ़ी अनुसरण कर रहे है और उसके परिणाम सामने है।

हमारे खानपान से क्या असर होता है मैं नही कह सकता क्योंकि खानपान सिर्फ जीभ की तृष्णा ओर पेट की भूख मिटाने को ही होते है।

स्कूल/कॉलेज इत्यादि का माहौल आज सबको पता है मैं खुद स्कूल में जोब करता हूँ और स्कूल में बड़ी क्लास के किशोरों के मन मे नए नए आकर्षण पैदा होना लाजमी है लेकिन उन्हें सही गाइडेंस नही मिल पाता जिसकी वजह से इस समय ये भटक भी ज्यादा रहे है। स्कूल कॉलेज आज पढाई कम और अपनी शान ओर शौकत को दिखाने जरिया बन चुका जा जिसकी वजह से युवा पीढ़ी पर बुरा असर पड़ रहा है और इसके परिणाम आपके सामने है।


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उम्मीद है अपने  शब्दों में मैंने जो भी कहा आप समझ पाएंगे।

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केसरिया क्रान्तिकारी


Tuesday, 20 February 2018

गाँव की यादें

                           
  
आज सुनाता हूँ कुछ भूली बिसरी मेरे गाँव की बातें,
मेरे गाँव के वो सुनहरे दिन वो चांदनी राते,

वो सबका मिलकर चौपालों पर बैठना,
छोटी छोटी बातों पर दोस्तों से ऐंठना,
हर त्यौहार पर सबका एक हो जाना,
मिलकर एक परिवार बन जाना,
साथ में तीज त्यौहार मनाना,
वही था वास्तव में गाँव का असली खजाना,
लाती थी किसी की बुआ किसी की मौसी साथ अपने खुशिओं की सौगाते,
आज सुनाता हूँ कुछ अच्छी भूली बिसरी मेरे गाँव की बातें,

रोज शाम दादी के साथ मंदिर जाना,
मंदिर तो था बस दादी के साथ घुमने जाने का एक बहाना,
खेतों पर जाकर वो कुऐ पर नहाना,
होकर तरो ताजा फिर पुरे गाँव में हुडदंग मचाना,
रोज रात को दादी का अलग अलग कहानियां सुनना,
कहानी सुनते सुनते दादी की गोद में ही सो जाना,
काहनी का थी वो बस दादी के प्यार की अनुपम बरसात थी,
धरती के उपर स्वर्ग हो जैसे कुछ ऐसी मेरे गाँव की बात थी.......||||||||||
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Chiksa

Wednesday, 3 January 2018

केसरिया ध्वज दिला रहा है हमको याद वही पुरानी...।।।।

 


जब शौर्य और साहस के बल पर दुनिया बनी थी हमारी दीवानी,
केसरिया बाना पहन जब रणभूमि में कूदी रजपूती जवानी,
स्वाभिमान की रक्षा हेतु जब जौहर करती थी माँ पद्मिनी जैसी महारानी,
आज केसरिया ध्वज दिला रहा है हमको याद वही पुरानी....।।।।

राणा प्रताप के साहस ने जब अकबर को याद दिला दी थी उसकी नानी,
17 बार गौरी को करके माफ जब सम्राट चौहान ने लिखी क्षमादान की नई कहानी,
गौरा बादल की स्वामिभक्ति जब इस दुनिया ने थी देखी और पहचानी,
आज केसरिया ध्वज दिला रहा है हमको याद वही पुरानी....।।।।

घड़ी विकट है संस्कृति का विनाश निकट है शांति की बाते हुई अब बेमानी,
अब उठेंगे शस्त्र धधकेगी ज्वाला प्रतिशोध की और सीने में जागेगी वीर भवानी,
दिखाना है अब जमाने को केवल वक्त बदला था ना बदला अभी तक रक्त स्वाभिमानी,
आज केसरिया ध्वज दिला रहा है हमको याद वही पुरानी....।।।।

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जय माँ भवानी        जय क्षात्र धर्म

     🚩🚩 केसरिया क्रान्तिकारी🚩🚩