Wednesday, 7 March 2018

युवा पीढ़ी के भटकाव के कारण कुँवर चेतन सिंह चौहान की नजर में|


सभी बड़े भाइयों, हमउम्र और छोटे भाइयों को सादर जय माता जी की सा।
 

एक भाईसाब ने पूछा की, "महिलाओं के प्रति घटिया सोच का कारण क्या है
हमारे संस्कार हमारी सोच,हमारी शिक्षा,हमारा सिस्टम,हमारा वातावरण,हमारा खानपान
या हमारा स्कूल/कॉलेज?"

उनके सवाल का जवाब मेरे शब्दों में ये है -

देखिए सभी बिंदु कही ना कही इसके जिम्मेदार है क्योंकि सभी की अपनी एक अहमियत होती है व्यक्ति के चरित्र निर्माण में।

मैं माता पिता के दिये संस्कारों पर कोई उंगली नही उठा रहा क्योंकि इतना मुझे हक नही लेकिन आजके पेरेंट्स अपने बच्चों को सोशल लाइफ से जुड़ने का अवसर तो प्रदान करते है, आधुनिकता से सम्पर्क तो कराते है, लेकिन उन्हें अपने इतिहास, शास्त्रों से परिचित नही करवाते जिसका असर आज की युवा पीढ़ी पर साफ साफ दिखाई देता है। पेरेंट्स टेलीविजन पर पर्दर्शित जोधा अकबर तो दिखा देते है पर साथ मे बैठकर उन्हें ये नही बताते की वास्तव में जोधा अकबर का इतिहास क्या है। फिर वही बेटी या बेटा जब घर की इज्जत लुटवाता है तो सिर पिट लेते है। बस यहीं कमी रह जाती है माँ पिता के संस्कारों में।

हमारा सिस्टम सबसे बेकार हो चला जा क्योंकि यहां संवेदना या संस्कृति कोई मायने नही रखती सिर्फ पैसा और प्रदर्शन मायने रखता है इसलिए सिस्टम तो हर प्रकार से जिम्मेदार है आज के युवाओं के आचरण के लिए।

हमारी सोच भी आज आधुनिकता के दौर में आधुनिक हो चली है फिर वो चाहे नारी सम्मान हो, माता पिता का या बुजुर्गों का सम्मान हो या अन्य कोई भी विषय सभी पर हम अपनी संस्कारित सोच को खोकर आधुनिक तौर पर सोचने लगे है इसलिए कुछ हद तक ये भी जिम्मेदार है।

हमारा वातावरण बेशक घरेलू स्तर पर सही हो परन्तु सबसे ज्यादा असर सोसाइटी के वातावरण का पड़ता है जो आजके समय बहुत हद तक दूषित हो चला है और इसका सीधा सीधा असर मानवीय सोच और समझ पर पड़ा है। हर जगह बलात्कर, छेड़छाड़ आदि घटाएँ आम हो चली है और कहते ह खरबूजे को देख खरबूजा रंग बदल लेता है तो जैसा आसपास हो रहा है वैसा ही कुछ युवा पीढ़ी अनुसरण कर रहे है और उसके परिणाम सामने है।

हमारे खानपान से क्या असर होता है मैं नही कह सकता क्योंकि खानपान सिर्फ जीभ की तृष्णा ओर पेट की भूख मिटाने को ही होते है।

स्कूल/कॉलेज इत्यादि का माहौल आज सबको पता है मैं खुद स्कूल में जोब करता हूँ और स्कूल में बड़ी क्लास के किशोरों के मन मे नए नए आकर्षण पैदा होना लाजमी है लेकिन उन्हें सही गाइडेंस नही मिल पाता जिसकी वजह से इस समय ये भटक भी ज्यादा रहे है। स्कूल कॉलेज आज पढाई कम और अपनी शान ओर शौकत को दिखाने जरिया बन चुका जा जिसकी वजह से युवा पीढ़ी पर बुरा असर पड़ रहा है और इसके परिणाम आपके सामने है।


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उम्मीद है अपने  शब्दों में मैंने जो भी कहा आप समझ पाएंगे।

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केसरिया क्रान्तिकारी


Tuesday, 20 February 2018

गाँव की यादें

                           
  
आज सुनाता हूँ कुछ भूली बिसरी मेरे गाँव की बातें,
मेरे गाँव के वो सुनहरे दिन वो चांदनी राते,

वो सबका मिलकर चौपालों पर बैठना,
छोटी छोटी बातों पर दोस्तों से ऐंठना,
हर त्यौहार पर सबका एक हो जाना,
मिलकर एक परिवार बन जाना,
साथ में तीज त्यौहार मनाना,
वही था वास्तव में गाँव का असली खजाना,
लाती थी किसी की बुआ किसी की मौसी साथ अपने खुशिओं की सौगाते,
आज सुनाता हूँ कुछ अच्छी भूली बिसरी मेरे गाँव की बातें,

रोज शाम दादी के साथ मंदिर जाना,
मंदिर तो था बस दादी के साथ घुमने जाने का एक बहाना,
खेतों पर जाकर वो कुऐ पर नहाना,
होकर तरो ताजा फिर पुरे गाँव में हुडदंग मचाना,
रोज रात को दादी का अलग अलग कहानियां सुनना,
कहानी सुनते सुनते दादी की गोद में ही सो जाना,
काहनी का थी वो बस दादी के प्यार की अनुपम बरसात थी,
धरती के उपर स्वर्ग हो जैसे कुछ ऐसी मेरे गाँव की बात थी.......||||||||||
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Chiksa

Wednesday, 3 January 2018

केसरिया ध्वज दिला रहा है हमको याद वही पुरानी...।।।।

 


जब शौर्य और साहस के बल पर दुनिया बनी थी हमारी दीवानी,
केसरिया बाना पहन जब रणभूमि में कूदी रजपूती जवानी,
स्वाभिमान की रक्षा हेतु जब जौहर करती थी माँ पद्मिनी जैसी महारानी,
आज केसरिया ध्वज दिला रहा है हमको याद वही पुरानी....।।।।

राणा प्रताप के साहस ने जब अकबर को याद दिला दी थी उसकी नानी,
17 बार गौरी को करके माफ जब सम्राट चौहान ने लिखी क्षमादान की नई कहानी,
गौरा बादल की स्वामिभक्ति जब इस दुनिया ने थी देखी और पहचानी,
आज केसरिया ध्वज दिला रहा है हमको याद वही पुरानी....।।।।

घड़ी विकट है संस्कृति का विनाश निकट है शांति की बाते हुई अब बेमानी,
अब उठेंगे शस्त्र धधकेगी ज्वाला प्रतिशोध की और सीने में जागेगी वीर भवानी,
दिखाना है अब जमाने को केवल वक्त बदला था ना बदला अभी तक रक्त स्वाभिमानी,
आज केसरिया ध्वज दिला रहा है हमको याद वही पुरानी....।।।।

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जय माँ भवानी        जय क्षात्र धर्म

     🚩🚩 केसरिया क्रान्तिकारी🚩🚩

Friday, 22 December 2017

घोर अँधेरे को जो चीरे वो सूर्य की किरण सी पहचान हो तुम..।।

मिशन किरण



कुछ सिमटती कुछ संभलती,
मानवता को रख आगे जो खुद पीछे चलती,
जिद पर अपनी जो पुरे जग से झगड़ती,
मिले गरीबों को हक़ बस इसी बात पर सबसे लड़ती,
कलयुग में माँ सरस्वती जैसी शान हो तुम,
घोर अँधेरे को जो चीरे वो सूर्य की किरण सी पहचान हो तुम.....।।।।।

इंसानियत है क्या ये तुमने सिखलाया है,
बनकर आशा की किरण चहुँ और उजियारा तुमने फैलाया है,
पहचान नहीं होती उम्र की मोहताज ये तुमने बतलाया है,
कर न सके जो महारथी वो तुमने करके दिखलाया है,
गर्व से उठा मस्तक चलते है जो उन अपनों का अभिमान हो तुम,
घोर अँधेरे को जो चीरे वो सूर्य की किरण सी पहचान हो तुम......।।।।।

चलते रहना अपने पथ पर कभी रुकना नही,
भले ही आयें संकट हजार लड़ने से कभी थकना नही,
खड़े है साथ आपके हम सब किसी के आगे झुकना नहीं,
दिलाना है हक़ हकदारों को जिद से कभी अपनी हटना नही,
गरीबों को जो मिला ईश्वर का वो अभयदान हो तुम,
घोर अँधेरे को जो चीरे वो सूर्य की किरण सी पहचान हो तुम.....।।।।।


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 🚩🚩केसरिया क्रांतिकारी 🚩🚩




Monday, 18 December 2017

आज एक कवि की कलम सीधे तुमसे संवाद करेगी|



चलो मान लिया की हिमाचल गुजरात जीत गये,
चुनावी संकट के दिन भले ही इन राज्यों से बीत गये,
पर याद करो जरा गुजरात को क्या परिणाम तुम्हे मिला है,
अपने गढ़ में खाई चोट ऐसा इनाम तुम्हे मिला है,
पद्मावती पर रह खामोश तुमने हिंदुत्व पर प्रहार किया है,
उदयपुर में बरसा लाठियां तुमने स्वाभिमान पर वार किया है,
गुजरात में मिली इस अधूरी जीत पर अहंकार में न फूलो तुम,
चतुर सिंह, आनन्दपाल पर उमड़े जनाक्रोश को  न भूलो तुम,
आज एक कवि की कलम सीधे तुमसे संवाद करेगी,
ये मुस्लिम तुष्टिकरण की निति देखना एकदिन तुम्हे बर्बाद करेगी जी,
देखकर आक्रोश जनता का देखो पक्ष विपक्ष ये सारा धूज रहा,
कमल का फूल हमारी भूल पुरे राजस्थान में बस यही नारा गूंज रहा,
जो मात्र सत्ता दल का करे गुणगान वो कोई कवि नहीं है जी,
सहता रहूँ अत्याचार ऐसी मेरी छवि नही है जी.....।।।।
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🚩🚩केसरिया क्रांतिकारी🚩🚩

Saturday, 9 December 2017

जागो ऐ रणधीरों


जागो ऐ शूरवीरों,
जागो मेरे समाज के रणधीरों,
देखो कैसा संकट आज ये छाया,
षड्यंत्रों में समाज ये घिर आया,
अन्धकार का ये बादल छाया,
वक्त ने वीरों को लाचार बनाया,

वक्त से आज तुम लड़ जाओ ओ वीरों,
जागो मेरे समाज के रणधीरों.....।।।।

अपनी खामोशी से क्या इतना तुम्हे आज प्यार हुआ,
देखों षड्यंत्र के तहत तुमपर कितना अत्याचार हुआ,
कल का अपराजित योद्धा क्यूँ इतना लाचार हुआ,
आखिर क्यूँ शत्रुओं का स्वप्न ये साकार हुआ,

अब तो स्वाभिमान जगाओ ओ वीरों,
जागो मेरे समाज के रणधीरों.....।।।।

बनकर राणा तुम लड़ जाओ,
हठी हमीर जैसे जिद पर अड़ जाओ,
कुछ ऐसा करके दिखलाओ,
की इतिहास पुन: अपना दोहराओ,

अपने स्वाभिमान को पहचानों ओ वीरों,
जागो मेरे समाज के रणधीरों.....।।।।




केसरिया क्रांतिकारी